How To Be Stress Free Essays In Hindi

Why do Hindi films have a ‘Masala’ format? Essay

1364 Words6 Pages

‘Bombay filmmakers repeatedly stress that they are aiming to make films which differ in both format and content from western films, that there is a definite skill to making films for the Indian audience, that this audience has specific needs and expectations, and that to compare Hindi films to those of the West, or the Indian ‘art’ cinema is irrelevant’ (Thomas, 1985). In comparison to much of Western Cinema, Hindi films have much more hyperbolic narratives, hyper-stylised and exaggerated acting mixed with overblown dialogue and tend to show disregard for characterisation, history, geography and occasionally camera placement. The format in which all these features conjoin is known affectionately as ‘Masala’ and considered by Hindi…show more content…

Though this is comedic and adds elements of fun and unpredictability to the scene, it is far from realistic and removes any serious message that the song may be trying to send. What also can be seen in a quick insert clip of a donkey, which does not correlate with what else is being seen. The song is taking place on a snowy mountain side with very little around but trees and when the camera cut to the shot of a donkey, who’s location is unknown, it interrupts the flow if the song. This is done for purely entertainment reasons and is used to keep the scene fresh and interesting to the audience, insisting that spectators can never be sure what is going to happen next. The song and dance sequences were inspired by early Hollywood musicals (1920’s- 1950’s) although Hindi films differed in many stylistic ways “For example, the Hollywood musicals had as their plot the world of entertainment itself. Indian filmmakers, while enhancing the elements of fantasy so pervasive in Indian popular films, used song and music as a natural mode of articulation in a given situation in their films. There is a strong Indian tradition of narrating mythology, history, fairy stories and so on through song and dance." In addition, "whereas Hollywood filmmakers strove to conceal the constructed nature

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Exam के दिनों में students का  tense  होना  स्वाभाविक  है . मेरी  समझ  से  Tense होना  हमेशा  बुरा  नही  होता , यदि  tension आपको  कुछ  अच्छा  करने  के  लिए  push करे  तो  वो  ठीक  है . अगर  अपने  school days को  याद  करूँ  और  उसमे  से  exams और  class  tests को  हटा  दूँ  तो  शायद  जितनी  पढाई  की  उसकी  25% ही  की  होती . Exams हमें  पढने  के  लिए  force करते  हैं , और  पढने  से  हमें  knowledge मिलती  है , knowledge हमें  confidence देता  है , जो किसी भी काम को करने के लिए जरूरी है …तो  in a way अगर  exams नहीं  होते  तो  आज  मैं  जो  कर  पा  रहा  हूँ  वो  नहीं  कर  पाता .

Exams हमें  दबाव  में  काम  करना  सीखाते  हैं , हमें  strong बनाते  हैं , वे  हमें  adverse situations handle करना  सीखाते  हैं , वे  हमें  selective होना  सिखाते  हैं , टाइम मैनेज करना सिखाते हैं, वे  हमें  stretch करना  सीखते  हैं , और  ये  सभी  चीजें  life में  successful होने  के  लिए  कहीं  न  कहीं  चाहिए  होती  हैं .

Friends , exams  के समय थोडा  stress होना  , थोडा pressurize होना लाज़मी है , पर यदि हम एक्साम्स को एक अलग mind-set  के साथ handle  करें तो हमें फायदा होगा. और आज इस article  में मैं आपसे ऐसी ही 8  बातें शेयर कर रहा हूँ , तो आइये जानते हैं इन्हें:

1)      Exams अच्छे  हैं :

भले  ही  आज  आपको  ये  बुरे  लगें , लेकिन  यकीन  जानिये  ये  आपको  इंतना  कुछ  सिखा    जाते  हैं  की  आपकी  बाकी  की  life को  comparatively आसान  बना  देते  हैं . May be आप  exams को  एक  कड़वी दवा  के  रूप  में  देख  सकते  हैं , जिसे  आप  पीना  तो  नहीं  चाहते  पर  इसे  पीये  बिना  आपकी  बीमारी  भी  नहीं  जा सकती  .  खुद  से  बार -बार  कहिये , मन  में  दोहराइए ….exams अच्छे हैं …exams अच्छे हैं…चाहे तो लिखकर दीवार पर चिपका भी लीजिये.. फरक  दिखेगा .

2)      तैयारी  का  अलग  ही  मजा  है :

Exams की  तैयारी  कुछ  ख़ास  होती  है  और  board exams हों  तो  बात  ही  कुछ  और  है .  वो  घंटों  किताबों  में  उलझे  रहना , alarm लगा  कर  सुबह  उठाना , TV serials, cricket matches की  कुर्बानी  देना …joint study के  लिए  बैठना  और  कुछ  भी  ना  पढना 🙂 . Light जाने  पर  lamp जला  कर  पढना  ,and what not. ये  ऐसे  पल  होते  हैं  जो  routine से  बिलकुल  अलग  होते  हैं , और  इनका  अपना  ही  मजा  होता  है . इन  पल  को  burden के  रूप  में  ना  देखें , बल्कि  enjoy  करें .

3)      आपको  अपना  best effort देना है ; बस !

Be realistic, अगर  आप  पहले  के  exams या  test में  average रहे  हैं  और  पूरे  साल  आपने  कुछ  extra efforts नहीं डाले  हैं  तो  सिर्फ  exams के  वक़्त  पढ़कर  चमत्कार  की  अपेक्षा  न   करें .  क्या  हुआ भूल  जाएं  , बस  ये  देखें  की  अब  आपके  पास  कितना  समय  बचा  है  और  उसमे  अपने  बेस्ट  effort देने  की  कोशिश  करें . ये  सोचना  बेकार   है कि आपके  class के  और  बच्चे  क्या – क्या  पढ़  चुके  होंगे , कितना  revise कर  चुके  होंगे , आपको  किसी  और  को  देखने  की  ज़रुरत  नहीं  है …किसी comparison की  ज़रुरत  नहीं  है …और  फायदा  भी  क्या  है  ऐसा  करने  से  , कुछ   सालों  बाद  उसमे  से  10% से  भी  कम  आपके  touch में  होंगे . …तो  दिखाना  किसे  है  ? बस  खुद  को  ! इसलिए   कुछ  ऐसा  न  करिए  कि  बाद  में  अफ़सोस  हो ….”काश  मैंने  पढाई  की  होती !!” and all.

अपना  best effort दीजिये  और  ऐसा  करते  हुए  आप  fail भी  हो  जाते  हैं  तो  कोई  बात  नहीं . लेकिन  बिना  effort किये  ही  हार  मान  लेते  हैं  तो  इससे  बुरी  भी  कोई  बात  नहीं . Just put in your best effort, बाकि  सब  भगवान्  पर  छोड़  दीजिये .

4)      Time is “Marks”:

Time एक limited resource है , इसे  waste करना  बेवकूफी  है . Exams के  समय  तो  ये  पाप  है .ये  समय  है  time को  manage करने  का  , smartly manage करने  का . ये  नहीं  की  बस  कोई  भी  subject उठाया  और  पढना  शुरू  कर  दिया . इसे  एक  strategy के  साथ  approach करिए , और  ये  strategy आपकी  अपनी  बनाई हुई  होगी ….unique होगी . ऐसे  plan out करिए  की  हर  subject पूरी  तरह  से  cover हो  जाये …ये  न  हो कि एक  subject को  5 दिन  दिए  और  एक  को  आधे  दिन  में  ही  निपटा  दिया .  इत्मीनान  से  बैठिये , गहरी  साँसे  लीजिये ,….ये  सोचिये  की  आपको  कौन  से  subject को  कितना  time देना  है . Date wise time-table create करिए , कोई  difficult subject है तो उसके  साथ  easy subjects पढने  का  भी  plan करिए . Sample papers या पिछले साल के पेपर्स solve करने  के  लिए  जरूर  वक़्त  निकालिए .  दोस्तों, time सिर्फ  money ही  नहीं  है  marks भी  है …so better don’t waste it.

5)      आपके  parents आपके  marks से  कहीं  अधिक  आपको  प्यार  करते  हैं :

पढने  के  लिए  किसे  डांट  नहीं  पड़ती !! Of course, उन  पढ़ाकू  लगों को छोड़ दीजिये जो किताब लेकर ही पैदा हुए हैं. पर  आपके -मेरे  जैसे  भोले -भाले  लोगों  को  पढने  के  लिए  डांट  पड़ना  तो  आम सी  बात  है . हमारे  parents इस  बात  को  लेकर  बहुत  चिंतित  होते  हैं  कि  हम  इस  cut throat completion के  युग  में  ठीक  से  settle हो  पाएं .  एक  अच्छी  नौकरी और  exams में  मिले  अच्छे  numbers का  जो  गहरा  नाता  है  वो उन्हें  चिंतित  कर  देता  है  कि  अगर  उनका  बच्चा  अच्छे  numbers नहीं  ला  पाया  तो  उसके  future का  क्या  होगा . और  यही  चिंता  उन्हें  आपको  डांटने …और  कभी  कभी  मारने  के  लिए  मजबूर  करती  है . Specially , middle class families में  जहाँ  अच्छा  future= अच्छे numbers माना  जाता  है  ये  और  भी  अधिक  देखने को मिलता है .

पर  आप  आज  की generation  के  हैं  , आप  smart हैं ; अपने  parents की सोच को समझिये , वो  आपको  बहुत  प्यार  करते  हैं …इतना  की  आपको  इस  cruel-world में  परेशान  होते  नहीं  देख  सकते  इसलिए  वो  आपको  पढने  को  कहते  हैं , उनका  सम्मान  करिए  ये  बात  गाँठ  बांध  लीजिये  कि  वो  भले  आपको  marks लाने  के  लिए  डांटे -फटकारें  but at the end of the day आप  उनकी  जान  हैं , किसी  भी  सूरत  में  वो  marks से  कहीं  अधिक  आपको  प्यार  करते  हैं !

6)      World is full of opportunities:

Only अच्छा future= अच्छा  marks is past. Present बिलकुल  अलग  है  , बिलकुल  fresh है . ये  कुछ -कुछ  3 Idiots की  story जैसा  है  ….जो  पुराना  है  उसे  बस  दो  चीजें  पता  हैं , लड़की  हुई  तो  Doctor , लड़का  हुआ  तो  Engineer, लेकिन  जो  नया  है  वो  तो  कुछ  भी  कर  सकता  है ….wild life photographer भी  बन  सकता  है .  जिस  दुनिया  में  हम  जी  रहे  हैं  वो  10-15 साल  पहले  की  दुनिया  से  बहुत  अलग  है ….India में  भी आज  career बनाने  के  ढेरों  options हैं . And luckily उनका  marks से  कोई direct relation नहीं  है . Liberalization की  wave ने   कई  viable career options  ओपन  कर  दिए  हैं   आज  आप  interior decorator,  fashion designer,  chef, actor, singer, sportsman,  blogger, choreographer, entrepreneur,  networker, और  ना  जाने  क्या – क्या  बन  सकते  हैं .

मैं  यहाँ  कुछ  super achievers के नाम  share कर  रहा  हूँ   जो  पढाई  लिखी  के  लहजे  से  काफी सामान्य थे:

  • Sunil Bharti Mittal – Bachelor of Arts and Science (Ludhiyana) – Founder of Airtel.
  • Kunwar Sachdev  –  BSc (Hons) Delhi – Founder of Sukam Inverter
  • Sanjeev Kapoor- Diploma in Hotel Mangement-  Celibrity Chef
  • Vishwanathan Anand – BCom ,Chennai   – Chess Grand Master
  • Sushant Singh Rajput –Btech Drop out—Actor of Kai Po Che and Pavitr रिश्ता
  • Priyanka Chopra— Not completed Graduation— Miss World, Actress

It means एक सामान्य स्टूडेंट हो कर भी आप लाइफ कुछ बड़ा हांसिल कर सकते हैं.

7)      जो होता  है  अच्छा  होता  है :

और  ज्यादातर  cases में  ये  बहुत  बाद  में  पता  चलता  है  कि  जो  हुआ  अच्छा  हुआ . आप  भी  exam में  paper खराब हो  जाने , या  even fail हो  जाने  पर  खुद  को  ज़रुरत से अधिक मत  कोसिये , कई  बार  success  की  शुरुआत  failure के  साथ  होती  है . इस  बात  में  हमेशा  यकीन  करिए  कि  आपके साथ  जो  best हो  सकता  है  वही  हो  रहा  है  और  अगर  कुछ  बुरा  हुआ  है  तो  वो  भी  आगे  चल  कर  आपकी  life से  कुछ  ऐसे  connect हो  जायेगा  जो  उसे  अच्छा साबित  कर  देगा .  For e.g Late Steve Jobs को  उन्ही  की  बनायीं company Apple से  निकाल  दिया  गया , पर  उन्होंने  बाद  में  खुद  अपनी  famous speech में  कहा  है  कि  इससे  अच्छा  उनकी  life में  कुछ  हो  ही  नहीं  सकता  था .

आगे  बढ़ते  हुए  इन  चीजों  को पूरी  तरह से  नहीं  समझा  जा सकता  पर  जब  बाद  में  हम   पीछे  मुड़  कर देखते  हैं  तो  events को  correlate कर  पाते  हैं  और  तब  समझ  में  आता  है  कि  जो  हुआ  अच्छा  हुआ .इसलिए  expected results ना  आने  पर  भी  दिल  छोटा  मत  कीजिये . क्या  पता  सालों  बाद  आप  भी  किसी  स्पीच में कहें  कि  इससे  अच्छा   आपके  साथ  कुछ  हो  ही  नहीं  सकता  था .

8)     Don’t worry कि “लोग क्या कहेंगे!!” :

To make it simple suppose करते  हैं  दुनिया  में  तीन  तरह  के  लोग  होते  हैं :

 A)       जो हमें सफल होते देखना  चाहते  हैं  : हमारे  parents,  family members, a few relatives and friends. Basically ऐसे लोग जिनसे हम emotionally बहुत  अधिक  attached होते  हैं .

B)      जो  हमें  असफल  होते  देखना  चाहते  हैं : वो  ऐसा  क्यों  चाहते  हैं ; I don’t know; इस  group में  कोई  भी  हो  सकता  है , कोई  fake friend, relative, पड़ोसी या कोई और.

C)       जिनको  हमसे  कोई  मतलब  नहीं  है :  Amitabh Bachchan, Sachin Tendulkar,   🙂  etc

जहाँ तक Exam और  उसके  results की बात है तो  सबसे  पहले  C type के  लोगों  को  भूल  जाइये ; क्योंकि  वो  भी  आपको  याद  नहीं  करते . Now, results को  लेकर  आपको  A type के लोगों  की  चिंता  नहीं  करनी  चाहिए , ये  आपकी  life के  pillars हैं , हर  परिस्थिति  में  आपके  साथ  खड़े  रहने  वाले , हाँ  ये  जरूर  हो  सकता  है  कि  ये  ऊपर से  ऐसा  न  दिखाएं  पर  इतना निश्चित है कि  इनसे  बड़ा  आपकी  life में  कोई  support हो  ही  नहीं  सकता .

A  ओर C  हो गए ; बचे  B type वाले , आप खुद  सोचिये  जो  लोग  आपको  असफल  होते  देखना  चाहते हैं  आपको  उन्हें  कितनी  importance देनी  चाहिए ….ज़रा  भी  नहीं . वो  जैसा  feel करते  हैं  करें , मेरे  fail होने  पर  खुश  होते  हों  तो  हों …मेरे  पास  होने  पर  रोते  हों  तो  रोएं , मुझे  तो  उनपर  ध्यान  ही  नहीं  देना  है . क्योंकि  उनपर  ध्यान  देना  मतलब  अपनी  life में  negativity को  attract करना   , इसलिए  just  leave them. अगर  आप  इस  group को  खुश  करें  की  कोशिश  करेंगे  तो  कभी  नहीं  कर पाएंगे ….

जब  आप  fail होंगे  तो  ये  कहेंगे ..”fail  हो  गया ….”

जब  आप  पास  होंगे  तो  ये  कहेंगे , “ तो क्या  हुआ  first division तो नहीं  ला पाया ना “

जब  आप  first division ले  आयेंगे  तो  ये  कहेंगे , “ जरूर  cheating किया  होगा ”

इनको  खुश  करने  वाले  हमेशा  दुखी  ही  रहते  हैं …और  कुछ  तो  suicide करने  जैसे  बेवकूफी भरे काम  को   भी  अंजाम  दे  देते  हैं …..ऐसे लोगों पर  दया  से  अधिक  गुस्सा  आता  है ….भला  कोई  अपने  पड़ोसी  की  नज़रों से  बचने  के  लिए  ये अपनी  माँ से हमेशा-हमेशा के लिए कैसे मुंह फेर सकता  है !!

Friends, आप academic exams में top कर पाएं या नहीं लेकिन ज़िन्दगी के इम्तहान में आप निश्चित रूप से top कर सकते हैं . इसलिए , जहाँ तक exams की बात है अपने best efforts से आप जो marks  ला पा रहे हैं लाइए , exams life का एक छोटा सा पार्ट हैं , इनका अपना मजा है , इसे enjoy करिए और आगे बढ़ते जाइये .

All the best ! 🙂

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Filed Under: Personal Development, Self Improvement, SuccessTagged With: Examination, Stress, तनाव, परीक्षा

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